लखनऊ: कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद उत्तर प्रदेश में एक बार फ़िर कम्प्लीट लॉकडाउन लग सकता है. ये लॉकडाउन कम से कम दस दिनों का होगा. सूबे में कोरोना के बढ़ते मामलों और इससे होने वाली मौतों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी चिंता और अपनी नाराजगी जताते हुए योगी सरकार को कम्प्लीट लॉकडाउन लागू करने का सुझाव दिया है.


चयनित तरीके से सबकुछ बंद करना होगा ताकि लोग बेवजह बाहर न निकलें
तमाम उपायों के बावजूद कोरोना वायरस के बढ़ते हुए संक्रमण को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि हमारी राय में लॉकडाउन से कम कोई उपाय संक्रमण रोकने में कारगर साबित नहीं होगा. परिणाम के लिए हमें चयनित तरीके से सबकुछ बंद करना होगा ताकि बेवजह बाहर निकलने वाले लोगों को उनके घरों के भीतर रहने के लिए विवश किया जा सके. यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने क्वारंटीन सेंटरों व अस्पतालों की हालत सुधारने की जनहित याचिका पर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा बल की कमी के कारण हर गली में पुलिस पेट्रोलिंग नहीं की जा सकती. बेहतर है कि लोग स्वयं ही घरों में रहें। जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलें.


योगी सरकार ने कहा
योगी सरकार की ओर से यूपी में लॉकडाउन होने की अटकलों पर स्पष्टीकरण दिया गया है. यूपी सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने इस बारे में मीडिया में एक प्रेस नोट जारी करते हुए कि ऐसी खबरें पूरी तरह से अफवाहों पर आधारित हैं.

बुधवार को अवनीश अवस्थी ने सरकार की ओर से उन खबरों पर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें यह कहा गया है कि 28 अगस्त से यूपी में संपूर्ण लॉकडाउन लगाया जा सकता है. इन खबरों में यह कहा गया है कि सरकार को हाई कोर्ट ने लॉकडाउन के सुझाव दिए हैं, इसपर ही फैसला करते हुए यूपी में एक बार लॉकडाउन लगाया जा सकता है.
सख्ती दिखाने में सरकारी अमला फेल- हाई कोर्ट
हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा है कि सरकारी अमला सड़कों पर लोगों को बेवजह निकलने, बाज़ारों में भीड़ इकट्ठा होने और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करा सकने में नाकाम साबित हुआ है. यही वजह है कि तमाम शहरों में कोरोना के केस काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का कहना है कि कम्प्लीट लॉकडाउन और उस पर सख्ती से अमल कराए बिना कोरोना के संक्रमण को काबू में नहीं किया जा सकता.
एक्शन प्लान लागू करने में नाकाम अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई

कोर्ट ने मुख्य सचिव को रोड मैप व कार्रवाई रिपोर्ट के साथ 28 अगस्त को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही उनसे पूछा है कि लॉक डाउन के बाद अनलॉक कर अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कोरोना संक्रमण रोकने का कोई एक्शन प्लान तैयार किया गया था या नहीं. यदि प्लान था तो उसे ठीक से लागू क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से समय-समय पर जारी आदेशों से साफ है कि कोई केंद्रीय योजना नहीं थी. कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह भी बताने को कहा है कि एक्शन प्लान लागू करने में नाकाम अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई. कोर्ट ने मुख्य सचिव को मांगी गई पूरी जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने चीफ सेक्रेट्री को 28 अगस्त को कोर्ट में हलफनामा पेश कर लाकडाउन समेत सभी बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है. चीफ सेक्रेट्री को यह भी बताना होगा कि लोगों को कोरोना से बचाने, बेहतर इलाज व देखरेख मुहैया कराने और मौत की दर को कम करने के लिए सरकार की तरफ से क्या एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. चीफ सेक्रेट्री को नये सिरे से तैयार रोडमैप और एक्शन प्लान भी कोर्ट के सामने अपने हलफनामे के ज़रिये पेश करना होगा. जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की डिवीजन बेंच ने यह आदेश क्वारंटीन सेंटर और अस्पतालों की हालत में सुधार के लिए दाखिल हुई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है.

हाई कोर्ट ने प्रदेश के सात जिलों लखनऊ, कानपुर नगर,प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, गोरखपुर और झांसी की स्थिति का जायजा लिया. कोरोना पॉजिटिव चुप्पी देवी की मौत मामले की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश की गई. कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी.

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