किसी हंसते मुस्कुराते चेहरे के पीछे कितनी तन्हाई छिपी है, हम अक्सर इसे पहचानने में भूल कर जाते हैं. यही भूल सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त और परिवार वालों से हो गई। उनका कोई अपना उनके अंदर के अकेलेपन और द्वन्द्व को पहचान पाता तो शायद आज सुशांत जैसा होनहार और हंसमुख इंसान हमारे बीच होता.

डिप्रेशन क्या है?
हमारी लाइफ में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनका हमारे मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर गहरा असर होता है. कुछ बातें होती हैं जो अंदर ही अंदर खाए जाती हैं. डिप्रेशन के लक्षणों (Symptoms Of Depression) को उदासी, नुकसान या ऐसे गुस्से के रूप में समझा जा सकता है, जिससे किसी इंसान की रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है. डिप्रेशन का इलाज (Treatment Of Depression) नहीं किया गया तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य काफी बुरा असर डाल सकता है. कुछ लोग खुद को जिंदगी से हारा हुआ समझने लगते हैं.
डिप्रेशन या मनो अवसाद आधुनिक समाज में एक बहुप्रचलित मानसिक रोग की श्रेणी में आता है.
संभवतः समय के साथ बढ़ते घरेलू विवाद, आपसी मतभेद, कार्य की व्यस्तता, दूसरों से आगे निकलने की होड़, अपने मनोनुकूल कार्य का न होना, दफ्तर में अपने से ऊपर बैठे अधिकारी द्वारा तिरस्कृत किया जाना, बढ़ते तनाव व गलत संगत की वजह से किसी नशे का आदी हो जाना, बदलते समय के अनुरूप अपनी सोच में बदलाव न लाना, लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित रहना तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण अपने अंदर की प्रतिभा तथा क्षमता को नजरअंदाज कर अपने आपको दूसरों से हीन समझना डिप्रेशन के मुख्य कारणों में से है.

डिप्रेशन एक ऐसा मानिसक रोग है जो दुनिया के एक बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित कर रह है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिप्रेशन अधिक पाया जाता है. ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट में डिप्रेशन के फैलाव का अनुमान पुरुषों में 1.9 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 3.2 प्रतिशत है और एक साल फैलने के बाद इसका पुरुषों में 5.8 प्रतिशत और महिलाओं में 9.5 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है.

क्यों होता डिप्रेशन?

मेडिकल की भाषा में जानें तो डिप्रेशन का मुख्य कारण हमारे ब्रेन में सेरोटॉनिन हॉर्मोन की कमी होती है. जब इस हॉर्मोन का बनना हमारे ब्रेन में कम हो जाता है तो हम नेगेटिविटी की तरफ बढ़ने लगते हैं. इसलिए डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है, जिसे मनोचिकित्सक यानी सायकाइट्रिस्ट से इलाज के द्वारा ठीक किया जा सकता है.

डिप्रेशन के लक्षण
• अकेलापन
• उदासी
• बहुत ज्यादा गुस्सा.
• अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे.
• बिस्तर से उठने या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी आपको टास्क लगती हैं.
• आप लोगों से कटने लगे हैं.
• आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं.
• महसूस हो कि कुछ भी ठीक नहीं हो रहा.
• ज्यादातर समय सिरदर्द रहना

डिप्रेशन के कारण
• शिक्षा और रोजगार का दबाव
• माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव
• रिलेशनशिप की समस्याएं
• पारिवारिक समस्याएं
• हॉर्मोन्स में बदलाव और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होना.
• कर्ज में डूबने की स्थिति में भी व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है.
• किसी काम में अगर उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिले या वह काम बिगड़ जाए.

डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के अंदर साइकोलॉजिकल, फिजिकल और सोशल सिप्टम्स दिखाई पड़ते हैं
• साइकोलॉजिकल लक्ष्मण की बात करें तो इसमें व्यक्ति दुखी और असहाय महसूस करता है। इतना ही नहीं, बल्कि वह किसी भी चीज के लिए अपने आप को दोषी भी मानते रहते हैं।
• फिजिकल सिम्टम्स में अवसाद ग्रस्त व्यक्ति थका हुआ रहता है और वह काफी धीरे बोलकर बात करते हैं। उसकी नींद में भी बदलाव हो जाता है और वह देर रात तक जगते रहते हैं।
• सोशल सिम्टम्स की बात करें तो ऐसे ही व्यक्ति लोगों और दोस्तों के कॉन्टेक्ट में आने से बचते हैं और समाज से जुड़ी किसी भी एक्टिविटी में भी हिस्सा नहीं लेते हैं। वह अपनी रोज की दिनचर्या में शामिल आदतों को भी छोड़ देते हैं। उन्हें परिवार के साथ समय बिताने में भी असहजता महसूस होती है। इसके अलावा भी यहां कुछ विशेष प्रकार के डिप्रेशन के लक्षणों को विस्तार में बताया जा रहा है।

क्या है डिप्रेशन का इलाज

वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया है कि दर्दनिवारक (Painkiller Medicine) और एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-Inflammatory) दवाओं से भी डिप्रेशन का इलाज (Treatment of Depression) संभव है. न्यूरोलॉजी न्यूरोसर्जरी एण्ड साइक्याट्री जरनल (Journal of Neurology Neurosurgery and Psychiatry) में छपे एक शोध में वैज्ञानिकों ने एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं) का डिप्रेशन के लक्षणों पर पड़ने वाले प्रभाव (Impact of Anti-Inflammatory Medicines on Depression Symptoms) को बताया है.

इस पत्रिका में 1600 से अधिक मरीजों पर 26 प्रकार के शोध के नतीजों का निष्कर्ष छापा गया है. इसमे साफ कहा गया कि जो लोग एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का सेवन करते हैं उनके अवसाद से उबरने की संभावना 79 फीसदी अधिक होती है. एंटी इंफ्लेमेटरी दवाओं में एस्पीरिन, इबूप्रोफेन, ब्लड प्रेशर के लिए इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन आती हैं.

बिना दवाई कैसे संभव है इलाज ?

पालतु जानवरों के संपर्क में आएं
डिप्रेशन से निजात पाने के लिए यह थेरेपी भी बहुत हद तक सफल रही है । जानवरों में एक विशेष प्रकार का खिंचाव, एक विशेष प्रेमयुक्त गुण होता है, जो डिप्रेशन के रोगी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है । ऐसा कईं बार देखा गया है कि डिप्रेशन से पीड़ित लोग जब पालतु जानवरों के संपर्क में आए तो उनके मानसिक स्तर पर इसका गहरा प्रभाव हुआ और वह जल्दी रिकवर कर पाए । डिप्रेशन पर कंट्रोल पाने के लिए आपको पालतु जानवरों का साथ फायदा देगा । अगर आप पालतु जानवर रखने में सक्षम नहीं है, तो अपने दोस्त, पड़ोसी के जानवर के साथ वक्त बिता सकते हैं ।

योग है उत्तम
मेडिकल साइंस कभी भी तथ्यों के बिना समर्थन नहीं करता, लेकिन योग और इसके अलग-अलग आसनों पर मेडिकल साइंस ने भी मुहर लगा दी है क्योंकि डिप्रेशन के ऐसे कईं केस जिनपर मेडिकल साइंस फेल हुई, योग कि वजह से चमत्कारी परिणाम देखने को मिले हैं । मेडिटेशन और इसके विभिन्न आयामों की मदद से डिप्रेशन का बिना किसी दवा के इलाज संभव हो पाया है और अभी भी इसपर काफी शोध चल रहा है ।

दोस्तों के साथ समय बिताएं
डिप्रेशन का लेवल चाहे जो भी हो, लेकिन अगर आप डिप्रेशन का अधिकतर वक्त अपने दोस्तों के साथ बीताते हैं, तो संभव हैं कि आप जल्द से जल्द रिकवर करें, क्योंकि दोस्ती वह रिश्ता होता है, जिसके सामने आप अपने असली रुप में होते हो । न झिझक होती है, न शरम और न ही कोई बैचेनी । आप अपने दिल की हर बात उससे बोल सकते हो । दोस्त के साथ वक्त बीताना आत्मविश्वास बढ़ाता है और आपके अंदर पॉजीटिव बदलाव लाता है, जो डिप्रेशन को कंट्रोल कर देते हैं

वो करें जिसमें मन लगे
आपको क्या खाना पंसद है, कौन सा खेल पसंद है, क्या घुमना अच्छा लगता है या तैराकी करना या फिर कुछ और जिसे करने को आपका मन बैचेन रहता है ।

डिप्रेशन से बाहर आने का यह भी एक सफलतम इलाज देखा गया है । जो लोग डिप्रैसन के कारण सालों से बदलाव की उम्मीद छोड़ चुके थे, इस तकनीक से स्वंय में बदलाव देख पाए । कुछ लोग पहाड़ों की यात्रा पर गए, कुछ पेंटिग करने लगे, कुछ संगीत की तरफ रुझान होने के कारण उधर चले गए और कुछ लोग भोजन में मग्न हो गए । परंतु कुछ दिनों के बाद उनमें परिवर्तने देखे गए । इसलिए यदि आपके आस-पास कोई डिप्रेशन, उदासीनता या नकारात्मकता का शिकार है, तो उसकी मदद करें ।

यदि आपका कोई परिचित डिप्रेशन से जूझ रहा हैं, तो इसे अनदेखा न करें । इससे पहले की समस्या ज्यादा बड़ी हो जाए, आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें और डिप्रेशन का इलाज कराएं ।

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