नई दिल्ली: भारत और चीन के बॉर्डर पर चल रहा तनाव चरम पर पहुंच गया है. सोमवार रात को दोनों देश के बीच खूनी झड़प हुई जिसमें दोनों देश को नुकसान पहुंचा है. जहां भारत के 20 जवान शहीद हो गए वहीं चीन के भी 43 जवान हताहत हुए है. बॉर्डर पर चीन की इस हरकत के बाद देश में चीन को लेकर काफी रोष दिखाई दे रहा है. कई राज्यों में चीन के राष्ट्रपति के पुलते जलाए जा रहे हैं.
भारत ने चीन की हरकत को लेकर अपना कड़ा विरोध जताया है. विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि चीन की वजह से गलवान घाटी में हिंसा हुई. चीन ने हमारी सीमा में टेंट गाड़ने की कोशिश की. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि गलवान में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई थी जो घटनाओं के लिए जिम्मेदार है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष से फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कड़े शब्दों में भारत-चीन सेना के बीच हुई हिंसक झड़प पर जबरदस्त प्रतिरोध जताया है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि गलवान में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई थी जो घटनाओं के अनुक्रम के लिए जिम्मेदार है. विदेश मंत्री एस.जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर फोन पर बात की है, दोनों देश सीमा पर तनाव कम करने को लेकर सहमत हुए हैं.
चर्चा के समापन पर, यह सहमति बनी कि पूरी स्थिति को एक जिम्मेदार तरीके से नियंत्रित किया जाएगा, और दोनों पक्ष 6 जून की सेनाएं कम करने की समझ को ईमानदारी से लागू करेंगे. कोई भी पक्ष मामले को आगे बढ़ाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करेगा और इसके बजाय, द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार शांति सुनिश्चित की जायेगी.
गौरतलब है कि सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई. इसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए तो चीन के भी 40 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं। 1975 के बाद पहली बार इस तरह की हिंसक घटना को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत शांति चाहता है लेकिन उकसावे पर माकूल जवाब देने का सामर्थ्य रखता है.

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