नई दिल्ली: दिल्ली में शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,320 नये मामले सामने आने के साथ कुल मामले बढ़ कर 27,500 से अधिक हो गये, जबकि इस महामारी से अब तक कुल 761 लोगों की मौत हुई है. दिल्ली में वर्तमान में 16 हजार से ज्यादा कोरोना के एक्टिव मरीज हैं. वहीं 10 हजार से ज्यादा लोग कोरोना मुक्त हो चुके हैं.
डॉ. महेश वर्मा कमेटी ने दिल्ली में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर शनिवार को दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली का हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर केवल दिल्ली के लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए. अगर बाहर वालों का भी इलाज होगा तो तीन दिन के अंदर सारे बेड भर जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में लोगों की राय मांगी गई थी. इसमें दिल्ली के 90 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि जब तक कोरोना है तब तक दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ दिल्लीवासियों का इलाज हो. उन्होंने बताया कि 5 डॉक्टर की एक कमेटी बनाई थी. उसने अपनी रिपोर्ट दी है. डॉ. महेश वर्मा इस कमेटी के अध्यक्ष थे. कमेटी ने कहा है कि जून अंत तक दिल्ली को 15,000 बेड की ज़रूरत होगी.

कमेटी का यह कहना है कि फिलहाल दिल्ली के अस्पताल दिल्ली वासियों के लिए होने चाहिए. बाहर वालों के लिए नहीं. अगर बाहर वालों के लिए खोल दिया तो 3 दिन में सब बेड भर जाएंगे. कैबिनेट ने फैसला लिया है. दिल्ली सरकार अस्पताल अब दिल्ली के लिए होंगे.

दिल्ली स्वास्थ्य सचिव पद्मिनी सिंगला ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा कि दिल्ली में पिछले एक सप्ताह में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी आई है. जिसके कारण अस्पतालों में बिस्तरों, सर्जिकल उपकरणों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी वस्तुओं की मांग बढ़ गई है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को इसका ऐलान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जून के अंत तक 15 हजार कोरोना के मरीजों के लिए बेड की जरूरत होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कल से दिल्ली में रेस्टोरेंट, मॉल्स और धार्मिक स्थल खोले जाएंगे, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सबको अनिवार्य है.

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