तमिलनाडु: मदुरै की पूर्णा सुंदरी देख नहीं सकतीं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इस वर्ष अपने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के अपने सपने को पूरा किया. उन्हें अपने चौथे प्रयास में इस वर्ष 286वीं रैंक मिली है.

आंखों में भले ही रोशनी न हो, लेकिन अगर नजरिया दुरुस्त है तो सपनें जरूर हकीकत में बदलते हैं. तमिलनाडु की दृष्टिहीन पूर्णा सुंदरी की कहानी आपको सिखाएगी कैसे आपका जुनून, लगन और मेहनत आपको कामयाबी के शिखर पर पहुंचा सकते हैं.

25 वर्षीय पूर्णा सुंदरी को परीक्षा की तैयारी के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने कहा, ‘तैयारी में मैंने ऑडियो फॉर्मेट में उपलब्ध अध्ययन सामग्री की मदद ली. इसके अलावा लैपटॉप में स्पीकिंग सॉफ्टवेयर की भी सहायता ली. मेरे माता-पिता ने मुझे किताबें पढ़-पढ़कर सुनाई. इसके अलावा मेरे दोस्त और सीनियर ने मुझे काफी सपोर्ट किया.’

इस सफलता पर पूर्णा ने बताया कि 2018 में उन्हें बैंक क्लर्क की नौकरी मिली. काम के दौरान सुबह और शाम को वे पढ़ा करती थी. मेंस और इंटरव्यू के दौरान बैंक से छुट्टी ली और अपनी पढ़ाई पर फोकस किया. तब जाकर ये सफलता उन्हें मिली है.

आंखों में रोशनी न होने के बावजूद जिस तरह अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जोश, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से उन्होंने सफलता पाई है, युवाओं के लिए एक नजीर बन गई हैं.

पूर्णा ने इस साल यूपीएससी परीक्षाओं में 286 वीं रैंक हासिल की है. इसके बाद दो दिनों से उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा है.

ऐसा नहीं था कि पूर्णा जन्म से ही नेत्रहीन थीं. 5 साल तक उन्होंने एक सामान्य बच्चे की तरह पढ़ाई की. लेकिन इसके उनकी आंखों की रोशनी लगातार कमजोर होती चली गई. कुछ समय बाद उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई. लेकिन उन्होंने अंधेरी जिंदगी में सपने लेना जारी रखा और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन के साथ मेहनत करती रहीं.

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा परिणाम नोटिस के अनुसार साल 2019 की परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर कुल 829 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा आयोग द्वारा की गयी थी. इनमें से 304 उम्मीदवार सामान्य वर्ग से हैं, जबकि 78 ईडब्ल्यूएस, 251 ओबीसी, 129 एससी और 67 उम्मीदवार एसटी वर्गों से हैं. इसके अलावा ज्यादा जानकारी के लिए अभ्यर्थी यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट का रुख भी कर सकते हैं.

स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण पर करना चाहती हूं काम 

अपने सेलेक्शन के बाद पूर्णा अब पूरी ऊर्जा से भरी है. पूर्णा कहती हैं कि परीक्षा पास करना केवल पहला कदम है. अभी और चुनौतियां मेरा इंतजार कर रही हैं. इससे आगे मैं स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण पर काम करना चाहती हूं. इसी से समाज आगे बढ़ेगा. सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए मैं अपना सारा प्रयास करूंगी.

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