भोपाल: मध्य प्रदेश के गुना में एक किसान परिवार पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने खुद को किसान का बेटा बताने वाले सीएम शिवराज के राज पर सवाल खड़े दिए हैं। शिवराज की सरकार में किसानों के साथ ऐसी बर्बर कार्रवाई कोई पहली बार नहीं हुई है. 6 जून 2017 को मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में अपना हक मांग रहे किसानों के सीने पर शिवराज सरकार में गोलियां दागी गई थीं. 6 किसानों की जान चली गई थी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या शिवराज की सरकार में किसानों के नसीब में बल गोलियां और लाठी खाना लिखा है?
जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस मुद्दे पर घेरा है। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी भाजपा और कांग्रेस पर हमला बोला है. दूसरी तरफ, भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि सरकार ने इस मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दे दिया है.
राहुल गांधी ने गुरुवार को इस घटना का वीडियो ट्वीटर पर साझा करते हुए लिखा, ‘हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के खिलाफ है.’ वहीं, प्रदेश कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने में लगी हुई है. 

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि एमपी के गुना पुलिस और प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के नाम पर दलित परिवार को कर्ज लेकर तैयार की गई फसल को जेसीबी मशीन से बर्बाद कर देना और उस दंपति को आत्महत्या का प्रयास करने को मजबूर कर देना अति-क्रूर और शर्मनाक है. इस घटना की देशव्यापी निंदा स्वाभाविक है. सरकार सख्त कार्रवाई करे.

एक अन्य ट्वीट में मायावती ने कहा, ‘एक तरफ भाजपा व इनकी सरकार दलितों को बसाने का ढिंढोरा पीटती है जबकि दूसरी तरफ उनको उजाड़ने की घटनाएं उसी तरह से आम हैं, जिस प्रकार से पहले कांग्रेस पार्टी के शासन में हुआ करती थी, तो फिर दोनों सरकारों में क्या अंतर है? खासकर दलितों को इस बारे में भी जरूर सोचना चाहिए.’

घटना पर विपक्ष ने शिवराज सरकार को घेरा
दलित किसान परिवार पर हुए पुलिसिया अत्याचार को लेकर विपक्ष ने शिवराज सरकार को घेरना शुरू कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया, ”ये शिवराज सरकार प्रदेश को कहाँ ले जा रही है ? ये कैसा जंगल राज है ? गुना में कैंट थाना क्षेत्र में एक दलित किसान दंपत्ति पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों द्वारा इस तरह बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज.”

क्या है मामला
गुना में मॉडल कॉलेज के निर्माण के लिए शासकीय कॉलेज प्रबंधन को जगनपुर चक क्षेत्र में 20 बीघा जमीन आवंटित की गई थी. जमीन पर काफी लंबे समय से गब्बू पारदी नाम के व्यक्ति का कब्जा था. कुछ समय पहले राजस्व और पुलिस की टीम ने मिलकर अतिक्रमण हटवा दिया था.

हालांकि विभाग की लापरवाही के चलते जमीन पर निर्माण नहीं हो सका. इसकी वजह से अतिक्रमणकारियों ने दोबारा जमीन को घेरना शुरू दिया था. वहीं, जब दलित दंपति को यहां से हटाया गया तो उन्होंने इस मुहिम के विरोध में कीटनाशक पी लिया. कीटनाशक पी लेने के बाद पुलिस द्वारा दंपति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां फिलहाल उनकी हालत में सुधार है.

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