लखनऊ: राज्यसभा चुनाव में हुई राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के खिलाफ आक्रमक तेवर अपना लिए हैं. मायावती ने सूबे के एमएलसी चुनाव में सपा को हराने के लिए बीजेपी को समर्थन करने की बात तक कह दी है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि सपा को यह हरकत भारी पड़ेगी.
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (Rajyasabha) के दौरान बसपा में बगावत सामने आने के बाद से सियासत गरमाई हुई है. राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले सात विधायकों को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने निलंबित कर दिया है. बीएसपी ने विधायक असलम राइनी ( भिनगा-श्रावस्ती), असलम अली (ढोलाना-हापुड़), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर-इलाहाबाद), हाकिम लाल बिंद (हांडिया- प्रयागराज) , हरगोविंद भार्गव (सिधौली-सीतापुर), सुषमा पटेल( मुंगरा बादशाहपुर) और वंदना सिंह -( सगड़ी-आजमगढ़) को पार्टी से निलंबित किया गया है. बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने विधायकों के निलंबन का ऐलान किया. इतना ही नहीं उनकी सदस्यता को सामाप्त करन के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने की बात भी मायावती ने कही है. 
मायावती ने कहा, ‘लोकसभा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक ताकतों से मुकाबला करने के लिए हमारी पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन उनके परिवार में चल रही आंतरिक कलह की वजह से उन्हें बीएसपी के साथ गठबंधन का अधिक फायदा नहीं मिल सका। चुनाव के बाद उनकी तरफ से प्रतिक्रिया मिलनी बंद हो गई, जिस वजह से हमने रास्ते अलग करने का फैसला लिया।’
बता दें कि उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटें अगले साल जनवरी में रिक्त हो रही है. इनमें से छह सीटों पर सपा जबकि दो सीटें पर बसपा और तीन सीटों पर बीजेपी के सदस्य हैं. यूपी के मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर 11 विधान परिषद सीटों में से बीजेपी 8 से 9 सीटें जीतने की स्थिति में है. वहीं, सपा की एक सीट पर जीत तय है और दूसरी सीट से उसे निर्दलीय सहित अन्य दलों के समर्थन की जरूरत होगी.

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