केंद्रीय बजट 2021 ​बस अब चंद घंटे दूर है. इस वर्ष, बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ बजट अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. निवेशकों के समक्ष हर रोज नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. इस वजह से इस बजट का महत्व बढ़ जाता है.
बजट की परिभाषा
बजट, भविष्य के लिये की गई वह योजना है जो, पूरे साल की राजस्व व अन्य आय तथा खर्चो का अनुमान लगा कर बनाई जाती है. जिसमे वित्तीय मंत्री के द्वारा, सरकार के समक्ष अपनी व्यय का अनुमान लगा कर, आने वाले वर्ष के लिये कई योजनायें बना कर, जनता के सामने हर वित्तीय वर्ष के दौरान प्रस्तुत करती है. एक आदर्श बजट वह होता है जिसमे,किसी का स्वार्थ ना हो. सरकार द्वारा उस बजट मे लोग, व्यापार, सरकार, देश, बहुराष्ट्रीय संगठन के लिये, एक व्यक्ति, परिवार, समूह के लिये अच्छी से अच्छी योजनायें बनाई गई हो तथा खर्चे व निवेश किये गये हो.
संविधान के अनुसार बजट
संविधान के अनुछेद (Artical) 112 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान ,संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाते है, जिसमे सरकार के गत वर्ष के आय/प्राप्तियों व व्ययों का ब्योरा होता है.

बजट निर्माण के उद्देश्य
प्रत्येक वर्ष के लिये सरकार पूर्व मे ही योजना बना लेती है. जिसमे सरकार की आय के स्त्रोत जैसे- भिन्न-भिन्न करो की वसूली या टैक्स, राजस्व से आय, सरकारी फीस-जुर्मना, लाभांश, दिये गये ऋण पर ब्याज आदि सभी आय और इन आय को वापस जनता के लिये लगाना बजट का मुख्य उद्देश्य होता है.
आर्थिक विकास की दर मे वृद्धि करना.
गरीबी व बेरोजगारी को दूर करना.
असमानताओ को दूर कर आय का सही योजनाओं मे उपयोग करना.
बाजार मे मूल्य व आर्थिक स्थिरता बनाये रखना.
अन्य सभी क्षेत्रों रेल, बिजली, वित्त, अनाज, खाद्यपदार्थ, बैंकों के लिये भी फण्ड रखना.
161 साल पहले आया था देश का पहला बजट
देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था. आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्तमंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था. यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक की अवधि के लिए था। 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया गया था.
आम जनता की बजट से क्या हैं उम्मीदें?
वित्त वर्ष 2021-22 का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को पेश करेंगी. निर्मला सीतारमण ने एलान किया है कि इस साल का बजट ऐसा आएगा, जैसा पिछले 100 सालों में भी पेश नहीं किया गया है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में ये तीसरा बजट होगा. वैसे तो आम बजट प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आम आदमी को प्रभावित करता ही है. इसलिए बजट पेश होना, हर किसी के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है.
सरकार अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपकर या अधिभार सेस एंड सरचार्ज लगा सकती है. इस साल भी कोविड-19 के कारण काफी खर्च होने वाला है. कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के लिए रूपरेखा बनाई जाएगी. तो, यह सरचार्ज बढ़ सकता है या इस वर्ष के बजट में एक कोविड सेस शामिल हो सकता है. इस तरह के उपकर और अधिभार एक निश्चित सीमा सीमा से ऊपर कमाने वाले लोगों को टारगेट करेंगे. यदि इस तरह के सेस आते हैं तो वह एक वर्ष से दो वर्ष तक वसूले जा सकते हैं.
मैन्यूफैक्चरिंग या विनिर्माण क्षेत्र में सरकार अधिक से अधिक क्षेत्रों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को जारी रख सकती है. यह पहले ही आत्मनिर्भर भारत अभियान 2.0 में हो चुका है. हम आयातित वस्तुओं जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, टायर आदि के लिए ड्यूटी बढ़ती देख सकते हैं. विभिन्न वस्तुएं भी बहुत कम आयात शुल्क को आकर्षित कर रही है. सरकार उन पर भी आयात शुल्क लगा सकती है. व्यापक फोकस घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर होगा.
हाउसिंग प्रॉपर्टी एक्सपेंडिचर का स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़े
महामारी के चलते हाउसिंग प्रॉपर्टी की मांग घटी है और रेंटल इनकम में कमी आई है. प्रॉपर्टी खाली होने के बावजूद हाउस ओनर्स को उनसे होने वाली इनकम वाले मेंटेनेंस कॉस्ट भरना पड़ रहा है. ऐसे कम से कम दो साल के लिए 30 पर्सेंट के स्टैंडर्ड डिडक्शन का रेट बढ़ाना सही रहेगा.
WFH इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन मिले
कोविड-19 के चलते वर्क फ्रॉम होम न्यू नॉर्मल हो गया है. प्रोफेशनल्स को कम्युनिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एडिशनल खर्च करना पड़ रहा है. इन खर्चों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन का बेनेफिट देना स्वागत योग्य कदम होगा.

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