नई दिल्ली: देश में नई शिक्षा नीति की घोषणा के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi) नई शिक्षा नीति पर अपनी बात रखी. 34 साल बाद बदलाव में लाई गई शिक्षा नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भविष्य की शिक्षा, रिसर्च जैसे मामलों पर चर्चा की. यह भी पढ़ें …New Education Policy: पढ़ाई, परीक्षा, रिपोर्ट कार्ड में क्या-क्या हुए हैं बदलाव https://theoutreach8.com/new-education-policy-पढ़ाई-परीक्षा-रिपोर्ट-क/

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति (National Education Policy) को देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक वैश्विक मूल्यों पर खरा उतरने वाला बताया. उन्होंने कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम वर्षों से पुराने ढर्रे पर चल रहा था जिसके कारण नई सोच, नई ऊर्जा को बढ़ावा नहीं मिल सका.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की
पीएम ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की आधारशिला तैयार करने वाली है. बीते अनेक वर्षों से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में क्यूरियोसिटी और इमैजिनेशन की वैल्यूज को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था.

पहले ‘वॉट टु थिंक’ अब ‘हाउ टु थिंक’
पीएम ने आगे कहा कि जमाना क्या सोचना है से कैसे सोचना है कि तरफ बढ़ गया है. मोदी ने कहा, ‘अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था में ‘वट टु थिंक’ पर फोकस रहा है जबकि इस शिक्षा नीति में ‘हाउ टु थिंक’ पर बल दिया जा रहा है. आज सूचनाओं की बाढ़ है. हर जानकारी मोबाइल पर भरी पड़ी है. ऐसे में यह जरूरी है कि कौन सी जानकारी हासिल करनी है और क्या पढ़ना है.’

युवाओं के सपने होंगे पूरे

संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे सामने सवाल था कि क्या हमारी नीति युवाओं को अपने सपने पूरा करने का मौका देती है. क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था युवा को सक्षम बनाती है. नई शिक्षा नीति को बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया है. दुनिया में आज एक नई व्यवस्था खड़ी हो रही है, ऐसे में उसके हिसाब से एजुकेशन सिस्टम में बदलाव जरूरी है. अब 10+2 को भी खत्म कर दिया गया है, हमें विद्यार्थी को ग्लोबल सिटीजन बनाना है लेकिन उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहें.

बच्चों में सीखने की ललक बढ़ाएगी NEP’
पीएम मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति किताबों का बोझ भी कम करेगी. पीएम ने कहा, ‘शिक्षा नीति में प्रयास किया गया है कि जो लंबा-चौड़ा सिलेबस होता है, ढेर सारी किताबें होती हैं, उसकी अनिवार्यता को कम किया जाए. अब कोशिश यह है कि बच्चों को सीखने के लिए डिस्कवरी बेस्ड, इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और अनैलसिस बेस्ड एजुकेशन पर जोर दिया जाए. इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी.’

‘राष्ट्र निर्माण में छात्रों भूमिका तय करेगी नई नीति’
मोदी ने कहा कि भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए, भारत के नागरिकों को और सशक्त करने के लिए एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है. भारत के छात्र नर्सरी में हों या फिर कॉलेज में, वो साइंटिफिक तरीके से पढ़ेंगे. तेजी से बढ़ती हुई जरूरतों के हिसाब से पढ़ेंगे तो राष्ट्र निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका निभा पाएंगाे.

सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है
शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है.इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था. स्कूल करिकुलम के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकुलम का स्ट्रक्चर देना, इसी दिशा में एक कदम है.

हमें टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब टेक्नोलॉजी ने हमें बहुत तेजी से, बहुत अच्छी तरह से, बहुत कम खर्च में, समाज के आखिरी छोर पर खड़े स्टूडेंट तक पहुंचने का माध्यम दिया है. हमें इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है.21वीं सदी के भारत से पूरी दुनिया को बहुत अपेक्षाएं हैं. भारत का सामर्थ्य है की कि वो टैलेंट और टेक्नॉलॉजी का समाधान पूरी दुनिया को दे सकता है हमारी इस जिम्मेदारी को भी हमारी एजुकेशन पॉलिसी एड्रेस करती है.

शिक्षा नीति में स्टूडेंट एजुकेशन और डिग्निटी ऑफ लेबर पर किया गया काम
नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्टूडेंट एजुकेशन और डिग्निटी ऑफ लेबर पर बहुत काम किया गया है.
हायर एजुकेशन को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट, क्रेडिट बैंक के पीछे यही सोच है. हम उस एरा की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा. इसके लिए उसे निरंतर खुद को री-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा.

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