UGC बनाम स्टूडेंट्स: फाइनल ईयर और सेमेस्टर की परीक्षाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर जारी यूजीसी की गाइडलाइन को चुनौती देती याचिका पर न्यायधीश जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली जस्टिस सुभाष रेड्‌डी और जस्टिस एमआर शाह की बेंच सुनवाई कर रही है. इससे पहले 14 अगस्त को कोर्ट ने अपना फैसला 18 अगस्त तक के लिए टाल दिया था. कोर्ट ने इस मामले में सरकार से पूछा कि क्या यूजीसी के आदेश और निर्देश मेें सरकार दख़ल दे सकती है?

इसके अलावा सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की – छात्रों का हित किसमें है ये छात्र तय नहीं कर सकते. इसके लिए वैधानिक संस्था है. छात्र ये सब तय करने के काबिल नहीं हैं. सरकारें बस दो ही काम कर सकती हैं अव्वल तो इम्तहान कराने में खुद को अक्षम बताते हुए हाथ खड़े कर दें या फिर पिछली परीक्षा के नतीजे के आधार पर रिजल्ट घोषित कर दें.

महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में कह दिया है कि आज की तारीख में परीक्षाएं कराना मुमकिन नहीं है, इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या सरकार ये कह सकती है कि बिना परीक्षा के सबको पास किया जाएगा, अगर हम ये मान लें तो किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी.
बता दें कि UGC द्वारा ग्रेजुएशन थर्ड ईयर के एग्जाम 30 सितंबर तक कराने का आदेश देने के मामले में ये सुनवाई हो रही है, परीक्षा का विरोध कर रहे याचिकाकर्ता छात्रों का तर्क है कि दिल्ली और महाराष्ट्र ने परीक्षा रद्द कर दी है.

बता दें कि याचिकाकर्ताओं में COVID पॉजिटिव का एक छात्र भी शामिल है, उसने कहा है कि ऐसे कई अंतिम वर्ष के छात्र हैं, जो या तो खुद या उनके परिवार के सदस्य COVID पॉजिटिव हैं. ऐसे छात्रों को 30 सितंबर, 2020 तक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर करना, अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है.

राज्यों के पास परीक्षा रद्द करने की शक्ति नहीं

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुंबई और दिल्ली राज्यों की तरफ से दिए गए एफिडेविट यूजीसी की गाइडलाइंस से बिल्कुल उलट हैं. तुषार मेहता ने कहा कि जब UGC ही डिग्री जारी करने का अधिकार रखती है. तो फिर राज्य कैसे परीक्षाएं रद्द कर सकते हैं?

UGC की दलील- स्टैंडर्ड खराब होंगे

इससे पहले यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फाइनल ईयर की परीक्षा रद्द करने का दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार का फैसला देश में उच्च शिक्षा के स्टैंडर्ड को सीधे प्रभावित करेगा. दरअसल, यूजीसी के सितंबर के अंत तक फाइनल ईयर की परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ जारी याचिका पर कोर्ट में जवाब दिया.


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