मुंबई: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शुक्रवार को बंबई हाईकोर्ट में कहा कि महाराष्ट्र सरकार को कोविड-19 महामारी के बीच अंतिम साल की परीक्षाएं निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है. सेवानिवृत्त शिक्षक और पुणे से विश्वविद्यालय सीनेट के पूर्व सदस्य धनंजय कुलकर्णी की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया गया. याचिका में परीक्षाएं निरस्त करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गयी है.

UGC ने क्या कहा
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी. इसपर सुनवाई के दौरान यूजीसी ने कहा कि ‘6 जुलाई को हमने नये दिशानिर्देश जारी किये थे. इसके अनुसार अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षा कराना अनिवार्य किया गया है. लेकिन महाराष्ट्र सरकार का फैसला इसके बिल्कुल विपरीत है. इस तरह से देश में उच्च शिक्षा का स्टैंडर्ड सीधे तौर पर प्रभावित होगा.

यूजीसी ने कोर्ट में कहा कि ‘महाराष्ट्र सरकार का फैसला उस न्यायिक दायरे का उल्लंघन करता है, जिसके अनुसार देश में उच्च शिक्षा के पैमानों के निर्धारण व समन्वयन का अधिकार विशेष रूप से संसद के पास सुरक्षित है. राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) के तहत फैसले लेकर यूजीसी एक्ट (UGC Act) के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकता.’

कहा गया कि परीक्षाओं के मानकों के नियमन के लिहाज से यूजीसी सर्वोच्च इकाई है. मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है.

यूजीसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि ‘आयोग ने यह दिशानिर्देश देशभर के स्टूडेंट्स के शैक्षणिक भविष्य का ख्याल रखते हुए लिया है. अगर सिर्फ स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए बिना परीक्षा डिग्रियां दे दी गईं, तो इससे स्टूडेंट्स के भविष्य को क्षति पहुंचेगी.’

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