नई दिल्ली: भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के शासन में भारत में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता लगातार गिर रही है और ‘भारत ने एक वैश्विक लोकतांत्रिक अगुवा का रास्ता बदलकर एक संकीर्ण हिंदु हितकारी देश का रुप अख्तियार कर लिया है. और इसकी कीमत समावेशी और समान अधिकारों को तिलांजलि देकर चुकाई जा रही है.‘ यह कहना है लोकतांत्रिक संस्था फ्रीडम हाऊस का, जिसने भारत की रैंकिंग स्वतंत्र देश से घटाकर ‘आशंकि स्वतंत्र’ देश के रूप में की है.
इस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2014 से जब से भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है तब से भारत में नागरिक स्वतंत्रता का क्षरण हो रहा है.इस रिपोर्ट में राजद्रोह के केस का इस्तेमाल, मुस्लिमों पर हमले और लॉकडाउन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र है. 
नई रिपोर्ट में इंडिया का स्कोर 71 से घटकर 67 हो गया है. यहां 100 का स्कोर सबसे मुक्त देश के लिए रखा गया है. जबकि भारत की रैंकिंग 211 देशों में 83 से फिसलकर 88वें स्थान पर आ गई है.
संस्था ने कोरोना संकट के दौरान बेढंगे तरीके से लगाए गए लॉकडाउन की भी आलोचना की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लॉकडाउन के कारण लाखों मजदूरों और कामगारों के सामने रोजी का संकट खड़ा हो गया और उन्हें सैकड़ों मील पैदल चलकर अपने गांवों तक जाना पड़ा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादियों ने कोरोना संक्रमण के लिए गलत तरीके से मुस्लिमों को बलि का बकरा बनाया और उन्हें उन्मादी भीड़ का निशाना बनना पड़ा.
इस रिपोर्ट को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने चिंता जताई है. साथ ही, केंद्र और सभी राज्‍य सरकारों को इसे गंभीरता से लेते हुए विश्व स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को कोई आघात लगने से बचाने के लिए सही ढंग व सही दिशा में कार्य करने की सलाह दी है.

बता दें कि इस रिपोर्ट के आने के बाद विपक्ष के नेता केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं,

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