नए आईटी नियमों को लेकर केंद्र सरकार और सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ट्वविटर के बीच विवाद छिड़ा हुआ है. मगर इस बार केंद्र सरकार ने ट्विटर को आखिरी चेतावनी दी है और कहा कि नए आईटी नियमों को मान लें और लागू करें, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहें. सरकार की ओर से जारी फाइनल नोटिस में कहा गया है कि नए आईटी नियमों के अनुपालन में विफल रहने पर ट्विटर आईटी कानून के तहत दायित्व से छूट गंवा देगी. दरअसल, सरकार ने ट्विटर इंडिया को नए आईटी नियमों का पालन करने के लिए फाइनल नोटिस जारी किया है.

सरकार ने कहा कि ट्विटर इंडिया को नए नियमों का तुरंत पालन करने के लिए एक अंतिम नोटिस दिया गया है, जिसके विफल होने पर आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत उपलब्ध दायित्व से छूट गंवा देगी और ट्विटर आईटी अधिनियम और भारत के अन्य दंड कानून के अनुसार परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा. इतना ही नहीं, सरकार ने ट्विटर से अनुपालन अधिकारी के अलावा कंपनी के एक कर्मचारी को शिकायत अधिकारी और नोडल संपर्क कर्मी नियुक्त करने को कहा है.

नए नियमों में क्या?

नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी पोस्ट के लिए शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. इसके लिए कंपनियों को तीन अधिकारियों (मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत निवारण अधिकारी) को नियुक्त करना होगा. ये अधिकारी भारत के ही रहने वाले होने चाहिए और इनका कॉन्टेक्ट नंबर सोशल मीडिया वेबसाइट के अलावा एप पर होना अनिवार्य है ताकि लोग शिकायत कर सकें. इसके साथ ही अधिकारियों के लिए शिकायत का अपडेट देने के लिए 15 दिनों की समयसीमा भी तय की गई है. कंपनियों को पूरे सिस्टम पर नजर रखने के लिए स्टाफ रखने को कहा गया है.

केंद्र ने तीन महीने का दिया था समय
नए आईटी नियमों की घोषणा 25 फरवरी को की गई थी और ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को इसे लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था. नियमों का पालन न करने के परिणामस्वरूप इन सोशल मीडिया कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है.
सरकार ने ट्विटर को दिया आखिरी मौका
इसके साथ ही सरकार ने आखिर में अपने पत्र में ट्विटर को नए डिजिटल नियमों को मानने के लिए आखिरी मौका देने की बात कही है. ऐसे में यदि ट्विटर इन नियमों को नहीं मानता है तो उसे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी के रूप में मिलने वाले छूट से हाथ धोना पड़ सकता है और साथ ही IT एक्ट और भारत के अन्य कानून के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

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