लखनऊ: यूपी पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रक्रिया के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगाई है. इसके साथ ही आरक्षण एवं आवंटन की कार्रवाई रोक दी गई है. मामले में राज्य सरकार सोमवार को जवाब दाखिल करेगी. अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने यह शासनादेश जारी किया. सभी जिलाधिकारियों को यह आदेश भेजा गया है .
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि जिला और क्षेत्र पंचायत चुनावों में आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था के लिए 1995 को आधार (बेस) वर्ष माना जा रहा है और उसी आधार पर आरक्षण किया जा रहा है. जबकि, राज्य सरकार ने 16 सितंबर, 2015 को एक शासनादेश जारी कर बेस वर्ष 2015 कर दिया था और उसी आधार पर पिछले चुनाव में आरक्षण भी किया गया था. कहा गया कि राज्य सरकार को इस वर्ष भी 2015 को बेस वर्ष मानकर आरक्षण को रोटेट करने की प्रकिया करना था किंतु सरकार मनमाने तरीके से 1995 को बेस वर्ष मानकर आरक्षण प्रकिया पूरी कर रही है और 17 मार्च 2021 को आरक्षण सूची घोषित करने जा रही है.
गौरतलब है कि आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश सरकार और पार्टी में मंथन चल रहा था. इसे लेकर असंतोष भी देखा गया है. कई सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों ने आलाकमान से यह शिकायत की है कि वे लोग पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी करके बैठे थे लेकिन इस आरक्षण के फॉर्मूले के कारण वे अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. 

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