जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाए जाने को लेकर अडिग हैं. इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री कांग्रेस के विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे और यहां राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की. इसी दौरान विधायकों ने राजभवन परिसर में नारेबाजी की. सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाए जाने से इनकार किया है.

राजभवन जाने से पहले मुख्यमंत्री फेयरमाउंट होटल में विधायकों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों को एकजुट रहना है और हमारे पास बहुमत है. इतना ही नहीं हमारी सरकार पांच साल तक चलेगी.

गहलोत ने कहा, ”हमारा मानना है कि ऊपर से दबाव के कारण वह (राज्यपाल) अभी विधानसभा सत्र बुलाने के लिए निर्देश नहीं दे रहे हैं. इस बात का हमें बहुत दुख है. जबकि हम सत्र बुलाना जाना चाहते हैं.”

क्या है गहलोत का अगला प्लान?
हाईकोर्ट से फैसला आने के बाद अशोक गहलोत की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गहलोत अब बगावत से बचने के लिए विधायकों का दिल जीतने की कोशिश करेंगे. कहा जा रहा है कि खुद मुख्यमंत्री नाराज़ विधायकों से वन टू वन बातचीत भी कर सकते हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि बीजेपी गुंडागर्दी कर रही है. क्या गवर्नर Article 174 के तहत विधानसभा सत्र बुलाने से इंकार कर सकते है? जब कांग्रेस सरकार विधानसभा सत्र बुलाना चाहती है तो बीजेपी भाग क्यों रही है?कब तक जनमत का चीरहरण करेंगे?

फ्लोर टेस्ट में किसका पलड़ा भारी?
सीएम अशोक गहलोत का दावा है कि उन्हें 103 विधायकों का समर्थन हासिल है. कहा जा रहा है कि इसमें कांग्रेस के 88, बीटीपी के 02, सीपीएम 02, आरएलडी के 1 और 10 निर्दलीय विधायक शामिल हैं. अगर पायलट गुट बाहर होता है तो सदन में उन्हें सिर्फ 91 विधायकों का साथ चाहिए होगा. ऐसे में गहलोत के लिए बहुमत साबित करना आसान होगा.

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