यदि पूछा जाए कि देश की राजधानी दिल्‍ली में सबसे पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी तो ज्‍यादातर लोग यही कहेंगे कि ऐसा राजपथ पर हुआ था. यह गलत जवाब है.
गणतंत्र दिवस क्या है और ये क्यों मनाया जाता है?
भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था और 26 जनवरी 1950 को इसके संविधान को आत्मसात किया गया, जिसके तहत भारत देश को एक लोकतांत्रिक, संप्रभु और गणतंत्र देश घोषित किया गया. इसलिए लिए हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है.
पहली बार कहां हुई थी परेड
देश में राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित होती है. यह परेड आठ किमी की होती है और इसकी शुरुआत रायसीना हिल से होती है. उसके बाद राजपथ, इंडिया गेट से होते हुए ये लाल किला पर समाप्‍त होती है. यह आज सभी जानते हैं. यदि पूछा जाए कि देश की राजधानी दिल्‍ली में सबसे पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी तो ज्‍यादातर लोग यही कहेंगे कि ऐसा राजपथ पर हुआ था.
कारण भी साफ है क्योंकि वर्तमान पीढ़ी ने जब से होश संभाला है तब से यही देख रहे हैं. लेकिन यह सही जवाब नहीं है. दरअसल 26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड राजपथ के बजाय तत्‍कालीन इर्विन स्‍टेडियम (अब नेशनल स्‍टेडियम) में हुई थी. उस वक्‍त इर्विन स्‍टेडियम के चारों तरफ चारदीवारी नहीं थी और उसके पीछे लाल किला साफ नजर आता था. उसके बाद से 1954 तक दिल्‍ली में गणतंत्र दिवस परेड इर्विन स्‍टेडियम के अलावा, किंग्‍सवे कैंप, लाल किला और रामलीला मैदान में आयोजित हुआ. उसके बाद 1955 में पहली बार राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन हुआ. उसके बाद से यहीं पर परेड होने का सिलसिला बदस्‍तूर जारी है.
गणतंत्र दिवस मनाने की परंपरा किसने शुरू की थी?
देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था. इसके बाद से हर साल इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है.
गणतंत्र दिवस पर होता है वीरों का सम्‍मान
हर साल 26 जनवरी को रायसीना हिल्स से निकलकर राजपथ होते हुए लालकिले तक परेड निकाली जाती है. गणतंत्र दिवस समारोह का समापन ‘बीटिंग रिट्रीट’ सेरेमनी से 29 जनवरी को किया जाता है. गणतंत्र दिवस पर ही राष्ट्रपति शूरवीरों को वीरता पुरस्‍कारों से सम्‍मानित करते हैं. गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति पद्म पुरस्कार देते हैं.
गणतंत्र दिवस की परेड देखने के लिए दूसरे देशों के राष्ट्राध्य्क्षों को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाता रहा है. हर साल परेड को देखने के लिए राजपथ पर दो लाख से ज्यादा लोग इकठ्ठा होते हैं. खास बात ये है कि भीषण ठंड होने के बावजूद लोग सुबह 4 बजे से ही परेड देखने के लिए पहुंच जाते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here