University Exams UGC Guidelines 2020: कोविड-19 महामारी के दौरान सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फाइनल ईयर की परीक्षाएं आयोजित करने के यूजीसी के 6 जुलाई के निर्देश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई की. मामले पर कई सुनवाई के बाद, अंतिम निर्णय आज होने की उम्मीद थी. लेकिन इसे 18 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. पूरे भारत में हजारों कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें बार-बार अपनी परीक्षा की तैयारी के साथ जारी रखने के लिए कहा गया है क्योंकि अभी तक परीक्षा के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

अंतिम वर्ष की परीक्षा अहम

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से कहा कि विद्यार्थी के अकादमिक करियर में अंतिम परीक्षा ‘अहम’ होती है और राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 30 सितंबर तक अंत तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से परीक्षा कराने को कहने वाले उसके छह जुलाई के निर्देश ‘बाध्यकारी नहीं’ है.

पिछली सुनवाई में यूजीसी ने क्या कहा था?
सोमवार को हुई पिछली सुनवाई में यूजीसी ने कोरोना के चलते महाराष्ट्र और दिल्ली सरकारों द्वारा राज्यों की यूनिवर्सिटीज में परीक्षा न कराने के फैसले पर सवाल उठाया था. UGC ने दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश पर जवाब दाखिल करने की बात कही थी, जिसमें राज्य में परीक्षा न कराने की बात कही गई थी. UGC की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा था कि परीक्षा आयोजित की जाएंगी या नहीं, यह फैसला UGC ही कर सकता है, क्योंकि सिर्फ UGC ही डिग्री प्रदान कर सकता है. सुनवाई के दौरान यूजीसी ने यह भी कहा कि बिना परीक्षा के मिली डिग्री को मान्यता नहीं दी जा सकती है.

छात्रों की समस्याएं
छात्रों के सामने इंटरनेट कनेक्ट‍िविटी से लेकर पाठ्यक्रम पूरा न होने जैसी कई समस्याएं सामने हैं. छात्रों की मुश्किलें हैं कि देशभर के कॉलेज होली की छुट्टियों के समय ही बंद हैं. इसके बाद लॉकडाउन के कारण उन्हें घर जाना पड़ा।. छात्रों की स्टडी मेटेरियल हॉस्टल के कमरों में बंद हैं. 20 से 30 प्रतिशत सिलेबस भी पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में परीक्षा कैसे दे सकते हैं?

छात्रों का कहना है कि महामारी के दौर में हमें सरकार से मदद की उम्मीद थी, जबकि सरकार हमें मौत के मुंह में धकेल रही है. यदि हम ऑफलाइन परीक्षा देते हैं, तो स्वयं और अन्य छात्रों सहित अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी संक्रमण का खतरा होगा, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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