नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. अब एनकाउंटर का ये मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है. तहसीन पूनावाला की ओर से NHRC में एनकाउंटर को लेकर शिकायत दर्ज की गई है.

तहसीन पूनावाला की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर पूरे मामले की छान-बीन करने की मांग की गई है. पूनावाला ने अपनी शिकायत में गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के अलावा उसके पांच साथियों के मारे जाने का भी मुद्दा उठाया है. शिकायत में ये कहा गया है कि विकास दुबे ने ख़ुद सबके सामने सरेंडर किया. 

तहसीन पूनावाला का आरोप है कि विकास दुबे को इसलिए फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया, ताकि उसके राजनीतिक और पुलिस महकमे में संबंध को सामने आने से बचाया जा सके.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा कि विकास दुबे का एनकाउंटर इसलिए कर दिया गया, ताकि राजनीतिक राज सामने ना आ सकें. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए.

हालांकि, यूपी पुलिस का कहना है कि गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे हथियार छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान पुलिसवालों से उसकी मुठभेड़ हुई, इसमें विकास दुबे मारा गया जबकि चार पुलिसवाले घायल हो गए.

क्या था बिकरू कांड? 

कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके का बिकरू गांव… 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। इस दौरान विकास और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों को गोलियों से भून दिया था। सरगना विकास 3 राज्यों की पुलिस को चकमा देकर यूपी से हरियाणा और फिर राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश पहुंच गया। सरेंडर के अंदाज में उज्जैन के महाकाल मंदिर से गुरुवार को विकास की गिरफ्तारी हुई। यूपी पुलिस उसे कानपुर ले जा रही थी, लेकिन रास्ते में विकास का वही अंजाम हुआ जिसके डर से वह भागता फिर रहा था। शुक्रवार सुबह कानपुर से 17 किमी पहले पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया।

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